
एडिटर इन चीफ शक्ति कुमार ✍️ ⇔
कुशीनगर। सलेमगढ़ सावित्रीबाई फुले ने समाज में
व्याप्त जातिवाद, अंध विश्वास और उंच निच का भेदभाव मिटाने का काम किया। उन्होंने एक सत्य शोध समाज की कल्पना करते हुए महिला शिक्षा के साथ शूद्रों के अधिकारों न के लिए समाज से संघर्ष करते हुए समाजिक न्याय और समानता की नींव रखी। उक्त बातें शनिवार को सलेमगढ बाजार में महात्मा सावित्रीबाई फुले के जयंती के अवसर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा नेता धनंजय र राय ने कही।
विशिष्ट अतिथि दीनानाथ ने कहा सावित्रीबाई फुले ने 1848 में सभी वर्गों के लिए सावित्रीबाई फुले ने पति ज्योतिबा फुले साथ मिलकर महिलाओं तथा दलितों के लिए पहला स्कूल खोला और समाज को चुनौती देते हुए। शिक्षा का अलख जगाने वं का काम किया। विशिष्ट अतिथि संजय पटेल ने कहा कि ज्योतिबाफुले ने एक ऐसे समाज की कल्पना की जहां समाज के सभी मनुष्य समान हों। समाज से भेदभाव मिट जाए।
स्वरचित नाटकों, न कविताओं और लेखों के माध्यम से समाज से गुलाम गिरी मिटाने की कल्पना किया। बिहार बुजुर्ग ग्राम प्रतिनिधि धीरज सैनी ने कहा कि समाज के सभी वर्ग के लोगों को जोड़ कर लेके चलने वाली र एक महिला शक्ति का मार्ग है सावित्रीबाई फुलेइसके पूर्व मुख्य अतिथि सहित आयोजक माली समाज 1 के सभी लोगों ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर माल्यार्पण किया। जहां माली समाज के जितेन्द्र सैनी, संतोष सैनी, प्रमोद सैनी, राजबली सैनी, बिनोद सैनी, झूलन माली, सुदर्शन माली. सदामा माली. विश्वनाथ जटाशंकर मख्य रूप से शामिल रहे।




