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बिहार में बिछेगी सड़कों की जाल, इन जिलों के लिए खुशखबरी। 

एडिटर इन चीफ शक्ति कुमार ✍️

पटना। बिहार में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य की कई प्रमुख सड़क परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश जारी किए हैं।

विभाग का मानना है कि यदि भूमि अधिग्रहण से जुड़ी अड़चनें दूर हो जाती हैं, तो वर्षों से अटकी सड़क योजनाओं को गति मिल सकती है।

भू-अर्जन निदेशक कमलेश कुमार सिंह ने सभी जिलों को उन परियोजनाओं की विस्तृत सूची भेजी है, जिनमें अब तक जमीन अधिग्रहण पूरा नहीं हो सका है। हालिया समीक्षा में यह बात सामने आई है कि अधिकांश परियोजनाएं मुआवजे के भुगतान में देरी, मुआवजे की दर को लेकर असहमति और कानूनी विवादों के कारण रुकी हुई हैं।

कहां-कहां फंसी हैं प्रमुख परियोजनाएं?

शेरपुर से दिघवारा के बीच गंगा नदी पर बन रहे छह लेन पुल के लिए जमीन अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। पुल के एप्रोच रोड के रास्ते में धार्मिक स्थल और शैक्षणिक संस्थान आने के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है। सारण जिले में लगभग 580 मीटर भूमि को लेकर मामला अब भी सुलझ नहीं पाया है।

एनएच-27 के किशनगंज से बहादुरगंज खंड में सड़क के एलाइनमेंट में बदलाव के चलते करीब 4.5 किलोमीटर क्षेत्र में नए सिरे से जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ी है। इसके लिए मुआवजे की व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों के बीच पत्राचार जारी है।

मुआवजे को लेकर नाराजगी

एनएच-231 के महेशखूंट-सहरसा-पूर्णिया मार्ग पर मरंगा और सुखिया मौजा के जमीन मालिक मुआवजे की दर को लेकर असंतोष जता रहे हैं। इसी तरह एनएच-139 डब्ल्यू के बाकरपुर-मानिकपुर खंड में कुछ जमीन मालिकों का भुगतान अब भी लंबित है, जबकि मुजफ्फरपुर क्षेत्र से जुड़ा एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

एनएच-139 डब्ल्यू के साहेबगंज-अरेराज-बेतिया रूट पर लगभग 55 किलोमीटर सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण शेष है। पश्चिमी चंपारण जिले में भी करीब 24 किलोमीटर हिस्से में प्रक्रिया अधूरी बताई जा रही है। वहीं, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर और पटना जिलों में भी भूमि अधिग्रहण का काम अलग-अलग चरणों में चल रहा है।

अधिकारियों को क्या निर्देश?

भू-अर्जन निदेशक ने जिला स्तर के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित विभागों, निर्माण एजेंसियों और जमीन मालिकों के साथ समन्वय बनाकर समस्याओं का समाधान करें। मुआवजा भुगतान में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि सड़क निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी न हो।

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