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बिहार के मोतीहारी में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा, CM नीतीश कुमार एवं सम्राट चौधरी रहे मौजूद। 

एडिटर इन चीफ शक्ति कुमार ✍️

विराट रामायण मंदिर परिसर में उमड़े श्रद्धालु। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। दोनों ने शिवलिंग की पूजा की और श्रद्धालुओं के साथ आशीर्वाद लिया।

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा बड़े धूमधाम से संपन्न हुई।

33 फीट ऊँचा और करीब 210 टन वजन वाला यह शिवलिंग सहस्र लिंगम के रूप में स्थापित किया गया। कार्यक्रम में भक्तिमय माहौल रहा और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।

प्राण प्रतिष्ठा के लिए पीठ पूजा उत्साहपूर्वक शुरू हुई।

समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी और उनके पति सायण कुणाल यजमान बने। काशी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वान पंडितों ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्यक्रम में शामिल हुए। उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने शिवलिंग की पूजा की और श्रद्धालुओं के साथ आशीर्वाद लिया। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।

श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर परिसर में जुटे थे। मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा इलाका गूँज उठा। पानी, चिकित्सा और अन्य सुविधाओं का भी इंतजाम किया गया था।

यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ग्रेनाइट पत्थर से तराशा गया था। इसे विशेष 96 पहियों वाले वाहन से कई राज्यों से होते हुए बिहार लाया गया। स्थापना के लिए 700 टन और 500 टन क्षमता वाली दो बड़ी क्रेनों का इस्तेमाल किया गया।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वीडियो संदेश जारी कर हर्ष जताया। उन्होंने कहा, “बिहार के चंपारण के केसरिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर तक विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग के पहुँचने पर हर्ष और गर्व व्यक्त करता हूँ।

यह न केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, बल्कि भारत की आध्यात्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूथ संकल्प की शक्ति का अद्भुत प्रतीक भी है।

मैं बिहार की जनता को विशेष रूप से बधाई देता हूँ कि यह उपलब्धि राज्य की आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक पटल पर सुदृढ़ करेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

यह आयोजन बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊँचाई देने वाला साबित हुआ। श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा रहा। मंदिर परिसर अब विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग के कारण तीर्थ स्थल के रूप में और प्रसिद्ध हो गया है।

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