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कुशीनगर,महिलाओं के ऑपरेशन के लिए गायनी के डॉक्टर की तय होगी अनिवार्यता. 

एडिटर इन चीफ शक्ति कुमार ✍️

पंजीकरण के समय डिग्री के साथ डॉक्टरों से लिया जाएगा शपथ पत्र

कुशीनगर। एक के बाद एक निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद मरीजों की हो रही मौतों ने हर किसी की चिंता बढ़ा दी है। पहले निजी अस्पताल बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब ऐसे कई अस्पतालों में मरीजों की मौत हो चुकी है।

इसे देखते हुए निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों को चिह्नित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा महिलाओं का ऑपरेशन गायनी के डॉक्टर ही करें, इसकी अनिवार्यता तय की जाएगी। यही नहीं, ऑपरेशन के बाद एक डॉक्टर भी जरुर रहें, इस पर जोर दिया जाएगा।

यह कहना है सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश का।

उन्होंने बुधवार को बताया कि सबसे पहले पंजीकरण स्तर पर ही इसे अनिवार्य किया जाएगा। नर्सिंगहोम या महिलाओं के प्रसव से संबंधित अस्पतालों के पंजीकरण के समय ही यह गहनता से जांच-पड़ताल की जाएगी कि उस अस्पताल के पास गायनी का कोई डॉक्टर है या नहीं। यही अनिवार्यता सर्जरी वाले सभी अस्पतालों में होगी।

उस डॉक्टर की डिग्री के अलावा शपथ पत्र भी लेने के साथ-साथ पंजीकरण करने से पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम उस अस्पताल पर भेजकर जांच कराई जाएगी। जिस अस्पताल में महिला मरीजों की सर्जरी होगी, वहां एक डॉक्टर मौजूद रहेगा, ताकि क्रिटिकल स्थिति में हालात संभाल सके।

कुछ निजी अस्पतालों में झोलाछाप द्वारा घूमकर मरीजों का ऑपरेशन किए जाने की बात संज्ञान में लाने पर सीएमओ ने कहा कि उन लोगों को चिह्नित किया जाएगा। यदि वे सर्जरी करने की योग्यता नहीं रखते और फिर भी ऐसा कार्य कर रहे हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी।

इसके अलावा आईएमए के डॉक्टरों,अन्य रजिस्टर्ड अच्छे डॉक्टरों के साथ बैठकर इस पर चर्चा की जाएगी। इस संबंध में जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि क्वालीफाइड डॉक्टर ही मरीजों का ऑपरेशन करें।

कई निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद हुई मरीजों की मौत: कुछ ही दिनों के भीतर जिले के कई निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद मरीजों की मौत हो चुकी है। हाटा के बाघनाथ स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में बवासीर के ऑपरेशन के बाद कप्तानगंज के राजमोहम्मद नाम के मरीज की मौत हो गई थी। पडरौना शहर के छावनी स्थित न्यू लाइफ हॉस्पिटल में जुड़वा बच्चों को जन्म देने के बाद प्रसूता की मौत हो गई थी।

इसी तरह रामकोला के गीतांजलि हॉस्पिटल में भी जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद अत्यधिक रक्तस्राव के चलते एक प्रसूता की मौत हो गई थी। अभी सोमवार को पडरौना क्षेत्र के खिरिया टोला स्थित हिंद हॉस्पिटल में भी बच्ची को जन्म देने के बाद एक प्रसूता की मौत हो गई थी।

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